जूठा खाना भगवान को चढ़ा सकते हैं या नहीं
की चेकलिस्ट
नहीं — सर्वथा वर्जित। शुद्ध, ताजा, अस्पर्शित भोजन ही भगवान को। शबरी/विदुरपत्नी = भक्ति चरम (अपवाद, नियम नहीं)। भोग पहले → प्रसाद → ग्रहण — क्रम उल्टा नहीं।
- 1शुद्धता — भगवान को शुद्ध, ताजा, अस्पर्शित भोजन ही अर्पित होता है।
- 2नैवेद्य नियम — भोग बनाते/चढ़ाते समय चखना भी वर्जित (प्रश्न 493)।
- 3सम्मान — जूठा = अपमान। भगवान को सर्वश्रेष्ठ ही अर्पित।
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