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काली कवच का पाठ करने की विधि और लाभ क्या है?

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रात्रि/संध्या। काली समक्ष, 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः'। शरीर अंग-अंग पर काली आवाहन। अमावस्या/शुक्रवार। लाभ: सर्वदिक् रक्षा, शत्रु विफल, अभय। गुरु उत्तम।

  1. 1रात्रि/संध्या काल = काली पूजा का समय।
  2. 2काली प्रतिमा/चित्र समक्ष, काले/नीले/लाल वस्त्र।
  3. 3घी दीपक + धूप।
  4. 4'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' 3 बार जपकर आरंभ।
  5. 5काली कवच पाठ — शरीर अंग-अंग पर काली के रूपों का आवाहन।
  6. 6अमावस्या/शुक्रवार/मंगलवार विशेष।
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काली साधना

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