कर्म का सिद्धांत क्या है हिंदू धर्म के अनुसार?
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कर्म सिद्धांत: प्रत्येक क्रिया का फल मिलता है। गीता में कर्मयोग — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'। निष्काम कर्म मोक्ष का मार्ग, राग-द्वेष युक्त कर्म बंधनकारी। यह पुरुषार्थ का सिद्धांत है, भाग्यवाद नहीं।
- 1सात्विक कर्म — शास्त्र विधि से, बिना अहंकार, बिना फल की इच्छा — श्रेष्ठ (गीता 18.23)
- 2राजसिक कर्म — अहंकार और फल की इच्छा से — मध्यम (गीता 18.24)
- 3तामसिक कर्म — मोह, आलस्य और अज्ञान से — निकृष्ट (गीता 18.25)
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