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कर्म सिद्धांत क्या है?

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कर्म = विचार + वाणी + कर्म। कोई कर्म नष्ट नहीं होता। तीन प्रकार: संचित (पुराने कर्मों का भंडार), प्रारब्ध (इस जन्म का भोग/भाग्य), आगामी (वर्तमान कर्म — भविष्य बदलते हैं)। निष्काम कर्म = मुक्ति। ज्ञान से कर्म नष्ट होते हैं (गीता 4.37)।

  1. 1हर कर्म का फल अवश्य मिलता है — कोई कर्म नष्ट नहीं होता।
  2. 2फल तत्काल भी मिल सकता है, या अगले जन्म में भी।
  3. 3ईश्वर न्यायकारी है — कर्मफल में किसी का पक्षपात नहीं।
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सनातन सिद्धांत

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