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कार्तिक मास में कार्तिक स्नान का क्या विशेष लाभ है?

की चेकलिस्ट

कार्तिक स्नान: सर्वाधिक पुण्य मास (पद्म पुराण), विष्णु प्रिय (श्रावण=शिव), ब्रह्म मुहूर्त ठंडा जल=तप, तुलसी+दीपदान। ब्रह्म मुहूर्त→स्नान→तुलसी→विष्णु जप→दीपदान। 30 दिन निरंतर। पाप क्षय+मोक्ष।

  1. 1सर्वाधिक पुण्यदायी मास: पद्म पुराण: 'कार्तिके यत्फलं स्नानात् तत्फलं नान्यतो भवेत्' — कार्तिक स्नान का फल अन्य किसी मास में सम्भव नहीं।
  2. 2विष्णु प्रिय: कार्तिक = विष्णु का अत्यंत प्रिय मास (जैसे शिव का श्रावण)। कार्तिक स्नान = विष्णु कृपा।
  3. 3ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सूर्योदय से पूर्व (4-5 बजे) ठंडे जल में स्नान = तप। शरद ऋतु = ठण्ड आरम्भ — ठंडे जल स्नान = कठोर तप = अधिक पुण्य।
  4. 4तुलसी पूजा: कार्तिक = तुलसी मास। स्नान + तुलसी पूजा + दीपदान = त्रिविध पुण्य।
  5. 5दीपदान: कार्तिक में प्रतिदिन सायंकाल मंदिर/तुलसी/नदी पर दीपदान = विशेष पुण्य।
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