कार्तिक मास में स्नान और दीपदान का क्या विधान है
की चेकलिस्ट
कार्तिक = सबसे पवित्र मास (पद्मपुराण)। स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में नदी/घर पर, सर्वपापनाशक। दीपदान: सन्ध्याकाल में तुलसी/पीपल/मन्दिर/नदी तट पर — घी/तिल तेल के मिट्टी दीये। तुलसी पूजा नित्य। कार्तिक पूर्णिमा = देव दीपावली। दान का विशेष पुण्य।
- 1सम्पूर्ण कार्तिक मास (विशेषकर कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा) ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए।
- 2नदी या पवित्र जलाशय में स्नान सर्वोत्तम, अन्यथा घर पर भी गंगाजल मिलाकर स्नान।
- 3स्नान मंत्र: 'कार्तिके यः करोत्स्नानं प्रातरुत्थाय मानवः। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥'
- 4स्नान के बाद तुलसी पूजा और विष्णु आराधना।
- 5कार्तिक मास में दीपदान (दीये जलाकर दान करना) का अत्यधिक महत्व है।
- 6विशेषकर सन्ध्याकाल (सूर्यास्त के बाद) में।
- 7तुलसी के पौधे के पास, पीपल/बरगद के नीचे, मन्दिर में, नदी तट पर दीपदान।
- 8घी या तिल तेल के दीये — मिट्टी के दीयों का प्रयोग।
- 9'दीपदानं करोत्यश्च कार्तिके हरिवासरे। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥'
- 10तुलसी पूजा प्रतिदिन — तुलसी में विष्णु का वास।
- 11एकादशी व्रत।
- 12कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) पर विशेष स्नान-दान।
- 13दीपावली भी कार्तिक मास में ही आती है।
- 14कार्तिक में दान का विशेष पुण्य — अन्नदान, वस्त्रदान, गोदान।
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