कठोपनिषद में यम नचिकेता संवाद का सार क्या
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कठोपनिषद: बालक नचिकेता ने यमराज से तीन वर मांगे — तीसरा: 'मृत्यु के बाद आत्मा है?' यम का उपदेश: श्रेय (ज्ञान) > प्रेय (भोग); आत्मा अमर (1.2.18); रथ रूपक — शरीर=रथ, बुद्धि=सारथी, आत्मा=स्वामी। सार: भोग-भय से परे आत्मज्ञान ही जीवन लक्ष्य।
- 1प्रथम वर — पिता प्रसन्न होकर स्वीकार करें — यम ने स्वीकार किया।
- 2द्वितीय वर — स्वर्ग प्राप्ति का अग्नि ज्ञान (नाचिकेत अग्नि) — यम ने सिखाया।
- 3तृतीय वर — 'मृत्यु के बाद आत्मा है या नहीं?' — यम ने बहुत समझाया कि यह प्रश्न मत पूछो, कुछ भी ले लो (राज्य, सुंदरियां, दीर्घायु)। परंतु नचिकेता अटल रहा।
- 4श्रेय और प्रेय (1.2.2) — दो मार्ग हैं: श्रेय (कल्याण/ज्ञान) और प्रेय (प्रिय/भोग)। बुद्धिमान श्रेय चुनता है, मूर्ख प्रेय।
- 5आत्मा अमर (1.2.18) — 'न जायते म्रियते वा विपश्चिन्' — ज्ञानी आत्मा न जन्मती, न मरती। यह अणु से अणु, महान से महान है।
- 6रथ रूपक (1.3.3-9) — शरीर = रथ, आत्मा = रथी (स्वामी), बुद्धि = सारथी, मन = लगाम, इंद्रियां = घोड़े, विषय = मार्ग। जिसकी बुद्धि (सारथी) कुशल है, वह मोक्ष प्राप्त करता है।
- 7ॐकार — 'एतद्ध्येवाक्षरं ब्रह्म' — ॐ ही ब्रह्म है।
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