कुलार्णव तंत्र में क्या शिक्षा दी गई है?
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कौल मार्ग। गुरु = सर्वस्व ('न गुरोरधिकं तत्त्वं')। पाशु→वीर→दिव्य। बाहरी < आंतरिक। पंचमकार = प्रतीकात्मक। गृहस्थ = साधना। कुल = शक्ति।
- 1गुरु महिमा: 'गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु...' = गुरु = सर्वस्व। गुरु बिना = साधना असंभव।
- 2कुल मार्ग: 'कुल' = शक्ति/परिवार — कुलाचार = शाक्त साधना।
- 3पाशु → वीर → दिव्य: साधक 3 श्रेणी — पाशु (बंधित) → वीर (साधक) → दिव्य (सिद्ध)।
- 4बाह्य vs आंतरिक: बाहरी कर्मकांड < आंतरिक साधना। 'मंदिर = शरीर।'
- 5मद्य निषेध (प्रतीकात्मक): कुलार्णव: 'मद्य = ज्ञान अमृत, मांस = जिह्वा संयम' — प्रतीकात्मक अर्थ प्राथमिक।
- 6जीवन = साधना: गृहस्थ जीवन = साधना क्षेत्र — त्याग ≠ संन्यास अनिवार्य।
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