लोहड़ी पर अग्नि पूजा कैसे करें?
की चेकलिस्ट
लोहड़ी अग्नि पूजा: संध्या को लकड़ी-उपले अग्नि → परिक्रमा → तिल-गुड़-मूँगफली-रेवड़ी आहुति → 'आदर आये दलिद्दर जाये!' → लोहड़ी गीत ('सुंदर मुंदरिये...') → प्रसाद वितरण। नवजात/नवविवाहित विशेष। शीत विदाई, उत्तरायण स्वागत।
- 1अग्नि स्थापना: संध्याकाल में खुले स्थान (आँगन/चौराहे) में लकड़ी, उपलों (गोबर के कंडे) का ढेर लगाकर अग्नि प्रज्वलित करें।
- 2परिक्रमा: परिवार-मित्रों सहित अग्नि की परिक्रमा करें।
- 3आहुतियाँ: अग्नि में तिल, गुड़, मूँगफली, रेवड़ी, पॉपकॉर्न (मक्के के दाने), गज़क की आहुतियाँ दें। 'आदर आये दलिद्दर जाये!' (समृद्धि आए, दरिद्रता जाए) बोलें।
- 4लोकगीत: 'सुंदर-मुंदरिये, होय!', 'लोहड़ी लई आ, दुल्ला भट्टी वालिया...' आदि लोहड़ी गीत गाएँ।
- 5प्रार्थना: अग्नि देव और सूर्य देव से प्रार्थना — शीत ऋतु बीते, समृद्धि आए, फसल अच्छी हो।
- 6प्रसाद: तिल-गुड़, रेवड़ी, गज़क, मूँगफली सबको बाँटें।
- 7नवजात शिशु/नवविवाहितों का विशेष: जिस घर में नई शादी या नया बच्चा हुआ हो, उस घर में लोहड़ी विशेष भव्यता से मनाई जाती है।
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