महाकालेश्वर शिवलिंग के पूजन, अभिषेक और ध्यान के लिए किन वैदिक और तांत्रिक मंत्रों का प्रयोग करना चाहिए?
की चेकलिस्ट
पूजा के लिए स्कंद पुराण का 'ॐ हूँ विश्वमूर्तये नमः', अकाल मृत्यु भय नाशक महाकालेश्वर गायत्री (ॐ महाकालेश्वराय विद्महे...), अघोर ध्यान मंत्र और शुद्धि के लिए आत्मतत्त्व शोधन मंत्र का प्रयोग करना शास्त्रसम्मत है।
- 1मूल पूजा मंत्र (स्कंद पुराणोक्त): अर्घ्य और धूप-दीप देते समय 'ॐ हूँ विश्वमूर्तये नमः' का उच्चारण अनिवार्य है। इसके बाद शिव के अस्त्र-शस्त्रों की पूजा 'त्रिशूल धनुः खड्ग कपाल कुठारेभ्यो नमः' से करनी चाहिए।
- 2महाकालेश्वर गायत्री मंत्र: अकाल मृत्यु के भय को दूर करने और इच्छाशक्ति सुदृढ़ करने हेतु 'ॐ महाकालेश्वराय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्' का जप रुद्राक्ष की माला पर किया जाता है।
- 3मूल अघोर मंत्र: वामाचार और अघोर ध्यान में स्वच्छंद तंत्रोक्त मंत्र 'अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥' का उपयोग होता है।
- 4आचमन एवं तत्त्व शुद्धि मंत्र: अघोर परंपरा में आंतरिक तत्त्वों की शुद्धि 'आत्म तत्त्वं शोधयामि स्वाहा, विद्या तत्त्वं शोधयामि स्वाहा, शिव तत्त्वं शोधयामि स्वाहा' से की जाती है।
- 5समर्पण: पूजन के अंत में 'श्री महाकालेश्वरार्पणमस्तु' बोलकर समस्त कर्म और फल महाकाल को समर्पित कर देना चाहिए।
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