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महालया पक्ष में पितरों की पूजा कैसे करें?

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पितृ पक्ष: भाद्रपद पूर्णिमा से अमावस्या (16 दिन)। मृत्यु तिथि पर श्राद्ध (अज्ञात हो तो अमावस्या)। विधि: दक्षिण मुख → अपसव्य जनेऊ → तिल-जौ-कुश-जल तर्पण → पिण्डदान → ब्राह्मण भोज → कौवे को भोजन → दान। गया पिण्डदान सर्वश्रेष्ठ।

  1. 1दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. 2जनेऊ अपसव्य (दाहिने कंधे पर) करें।
  3. 3हाथ में काले तिल, जौ, कुश और जल लेकर पितरों का नाम-गोत्र बोलते हुए तर्पण करें।
  4. 4मंत्र: '(नाम) गोत्राय (पिता/माता आदि) तिलोदकं ददामि।'
  5. 5पितृ तीर्थ मुद्रा (अंगूठे की ओर से) जल गिराएँ।
  6. 6चावल, तिल, जौ, दूध, शहद, घी से पिण्ड बनाएँ।
  7. 7कुश (दर्भ) के आसन पर पिण्ड रखें।
  8. 8पितरों को समर्पित करें।
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श्राद्ध-पितृ कर्म

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