महामृत्युंजय मंत्र कितनी बार जप करना चाहिए?
की चेकलिस्ट
नित्य साधना के लिए 108 बार (1 माला) पर्याप्त है। रोग निवारण या विशेष अनुष्ठान के लिए सवा लाख (1,25,000) जप का पुरश्चरण किया जाता है। सोमवार को 1008 जप का विशेष महत्व है।
- 1न्यूनतम: 108 बार प्रतिदिन (1 माला)
- 2मध्यम: 1008 बार (11 माला)
- 3उत्तम: 10,008 बार (108 माला — एकादशी या शिवरात्रि को)
- 4लघु अनुष्ठान: 1,25,000 (सवा लाख) — 40 दिन में
- 5पूर्ण पुरश्चरण: 5,00,000 (पाँच लाख)
- 6रोग निवारण: 1,25,000 (सवा लाख) — यह सर्वाधिक प्रचलित है
- 7ग्रह दोष निवारण: 1,25,000
- 8महादशा/अंतर्दशा में: 11,000 प्रतिदिन
- 9मृत्युतुल्य संकट: 1,25,000 अनुष्ठान
- 10एक बार जप शुरू करें तो प्रतिदिन की संख्या न घटाएं
- 11माला पूरी होने पर 'सुमेरु मनका' (मुख्य मनका) न लांघें — माला पलटकर वापस आएं
- 12सूतक-पातक में जप न छोड़ें — बाधा आने पर संख्या को दूसरे दिन पूरा करें
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