मांडूक्योपनिषद में ॐ का विश्लेषण क्या है
की चेकलिस्ट
मांडूक्य: ॐ = अ (जाग्रत/वैश्वानर) + उ (स्वप्न/तैजस) + म (सुषुप्ति/प्राज्ञ) + मौन (तुरीय/ब्रह्म)। चौथी अवस्था (तुरीय) — तीनों से परे, शांत, अद्वैत — यही आत्मा। 12 मंत्रों में संपूर्ण वेदांत। ॐ = अस्तित्व का ध्वनि मानचित्र।
- 1बाह्य जगत की चेतना। स्थूल शरीर। इंद्रियां बाहर की ओर सक्रिय।
- 219 मुख (5 ज्ञानेंद्रिय + 5 कर्मेंद्रिय + 5 प्राण + मन + बुद्धि + अहंकार + चित्त)।
- 3'अ' ॐ का प्रथम अक्षर — जाग्रत सबकी प्रथम अवस्था।
- 4आंतरिक जगत की चेतना। सूक्ष्म शरीर। मन स्वप्न जगत रचता है।
- 5इंद्रियां निष्क्रिय, मन सक्रिय।
- 6'उ' मध्य अक्षर — स्वप्न मध्यवर्ती अवस्था।
- 7गहन निद्रा। न स्वप्न, न बाह्य चेतना। कारण शरीर। आनंद का अनुभव (गहरी नींद के बाद सुख)।
- 8सब ज्ञान एक बिंदु में सिमटा — अविभक्त।
- 9'म' अंतिम अक्षर — सुषुप्ति अंतिम सामान्य अवस्था।
- 10यह चौथी अवस्था — अ, उ, म — तीनों से परे। ॐ उच्चारण के बाद का मौन (silence)।
- 11न जाग्रत, न स्वप्न, न सुषुप्ति — न बाहर, न अंदर, न दोनों।
- 12यही आत्मा/ब्रह्म है।
- 13मांडूक्य मंत्र 7 — 'नान्तःप्रज्ञं न बहिष्प्रज्ञं नोभयतःप्रज्ञम्... शान्तं शिवमद्वैतं चतुर्थं मन्यन्ते स आत्मा स विज्ञेयः' — शांत, शिव (कल्याणकारी), अद्वैत — यही आत्मा है, यही जानने योग्य है।
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