मंदिर का निर्माण किस दिशा में होना चाहिए?
की चेकलिस्ट
प्रवेश: पूर्व (सर्वश्रेष्ठ) — सूर्य किरण गर्भगृह तक। गर्भगृह: पश्चिम। घर: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) = ईश्वर का स्थान। पूजा मुख: पूर्व/उत्तर। भूमि: आयताकार/वर्गाकार। जलाशय: उत्तर/पूर्व। शौचालय/सीढ़ी/बेडरूम/किचन के पास = वर्जित।
- 1ईशान = ईश (ईश्वर) + आन (स्थान) = ईश्वर का स्थान
- 2उत्तर-पूर्व में सबसे अधिक सकारात्मक ऊर्जा
- 3सूर्य की प्रथम किरण इसी दिशा से
- 4पूर्व दिशा — सर्वश्रेष्ठ
- 5उत्तर दिशा — शुभ (कुबेर/धन दिशा)
- 6दक्षिण/पश्चिम — अनुशंसित नहीं
- 7भूमि आयताकार (Rectangular) या वर्गाकार (Square) — सर्वोत्तम
- 8पिरामिडनुमा आकार — शिखर/विमान के लिए
- 9जलकुंड/सरोवर — उत्तर या पूर्व दिशा में
- 10प्रवेश द्वार — पूर्व (प्रमुख), उत्तर (द्वितीय)
- 11प्रवेश द्वार अन्य द्वारों से बड़ा हो
- 12ध्वज स्तम्भ — प्रवेश द्वार के सामने
- 13शौचालय के पास
- 14सीढ़ियों के नीचे
- 15बेडरूम में (अनिवार्य हो तो पर्दे से ढकें रात में)
- 16किचन में
- 17मृतक/श्मशान स्थल पर
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श्रेणी
मंदिर वास्तु
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