मंदिर का निर्माण किस दिशा में होना चाहिए?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
प्रवेश: पूर्व (सर्वश्रेष्ठ) — सूर्य किरण गर्भगृह तक। गर्भगृह: पश्चिम। घर: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) = ईश्वर का स्थान। पूजा मुख: पूर्व/उत्तर। भूमि: आयताकार/वर्गाकार। जलाशय: उत्तर/पूर्व। शौचालय/सीढ़ी/बेडरूम/किचन के पास = वर्जित।
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श्रेणी
मंदिर वास्तु
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