मंदिर की मूर्ति खंडित हो जाए तो क्या करना चाहिए?
की चेकलिस्ट
खंडित मूर्ति पूजा = निषिद्ध (अग्निपुराण)। विधि: उद्वासन (देवता को कलश में स्थानांतरित) → पवित्र जल में विसर्जन → नवीन मूर्ति + प्राण प्रतिष्ठा। अपवाद: स्वयम्भू मूर्तियाँ (कुछ में)। घर की खंडित मूर्ति भी विसर्जित करें। कूड़ेदान में कभी न फेंकें।
- 1अंग खंडन — हाथ, पैर, नाक, उंगली आदि टूटना = गम्भीर — मूर्ति पूजा योग्य नहीं
- 2मामूली दरार/खरोंच — यदि मुख्य अंग अक्षत हैं, तो कुछ परम्पराओं में मरम्मत स्वीकार्य
- 3सम्पूर्ण विखंडन — मूर्ति पूर्णतः टूट जाए — तत्काल विसर्जन
- 4खंडित मूर्ति से देवता की चैतन्य शक्ति को मंत्रों द्वारा किसी कलश या अस्थायी मूर्ति में स्थानांतरित
- 5यह प्राण प्रतिष्ठा की विपरीत क्रिया है
- 6खंडित मूर्ति को पवित्र जलाशय (नदी, सरोवर, समुद्र) में विसर्जित
- 7विसर्जन विधिवत मंत्रों के साथ
- 8मूर्ति को कभी कूड़ेदान में न फेंकें
- 9नवीन मूर्ति का निर्माण (शिल्पशास्त्र अनुसार)
- 10पुनः प्राण प्रतिष्ठा
- 11हवन, ब्राह्मण भोजन, दान
- 12स्वयम्भू मूर्तियाँ (प्राकृतिक रूप से प्रकट — जैसे कुछ शिवलिंग) — इनका खंडन होने पर भी पूजा जारी रह सकती है (कुछ परम्पराओं में)
- 13शालग्राम शिला — प्राकृतिक होने से खंडन का प्रश्न प्रायः नहीं उठता
- 14मामूली मरम्मत — कुछ विद्वानों के अनुसार यदि मूर्ति का मूल स्वरूप अक्षुण्ण हो तो मरम्मत स्वीकार्य
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