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मंदिर नियम📜 अग्निपुराण, मत्स्यपुराण, शिल्पशास्त्र, स्कन्दपुराण, धर्मसिन्धु2 मिनट पठन

मंदिर की मूर्ति खंडित हो जाए तो क्या करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

खंडित मूर्ति पूजा = निषिद्ध (अग्निपुराण)। विधि: उद्वासन (देवता को कलश में स्थानांतरित) → पवित्र जल में विसर्जन → नवीन मूर्ति + प्राण प्रतिष्ठा। अपवाद: स्वयम्भू मूर्तियाँ (कुछ में)। घर की खंडित मूर्ति भी विसर्जित करें। कूड़ेदान में कभी न फेंकें।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति यदि खंडित हो जाए तो यह एक गम्भीर स्थिति मानी जाती है। शास्त्रों में इसके लिए स्पष्ट विधान दिए गए हैं।

शास्त्रीय विधान

1खंडित मूर्ति की पूजा — निषिद्ध

अग्निपुराण और मत्स्यपुराण: खंडित (टूटी हुई) मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए। खंडित मूर्ति 'अपूर्ण' होती है और उसमें देवता की चैतन्य शक्ति क्षीण हो जाती है।

2खंडन के प्रकार

  • अंग खंडन — हाथ, पैर, नाक, उंगली आदि टूटना = गम्भीर — मूर्ति पूजा योग्य नहीं
  • मामूली दरार/खरोंच — यदि मुख्य अंग अक्षत हैं, तो कुछ परम्पराओं में मरम्मत स्वीकार्य
  • सम्पूर्ण विखंडन — मूर्ति पूर्णतः टूट जाए — तत्काल विसर्जन

3विधि — क्या करें

चरण 1: उद्वासन (देवता को विदा करना)

  • खंडित मूर्ति से देवता की चैतन्य शक्ति को मंत्रों द्वारा किसी कलश या अस्थायी मूर्ति में स्थानांतरित
  • यह प्राण प्रतिष्ठा की विपरीत क्रिया है

चरण 2: विसर्जन

  • खंडित मूर्ति को पवित्र जलाशय (नदी, सरोवर, समुद्र) में विसर्जित
  • विसर्जन विधिवत मंत्रों के साथ
  • मूर्ति को कभी कूड़ेदान में न फेंकें

चरण 3: नवीन मूर्ति स्थापना

  • नवीन मूर्ति का निर्माण (शिल्पशास्त्र अनुसार)
  • पुनः प्राण प्रतिष्ठा
  • हवन, ब्राह्मण भोजन, दान

4अपवाद

  • स्वयम्भू मूर्तियाँ (प्राकृतिक रूप से प्रकट — जैसे कुछ शिवलिंग) — इनका खंडन होने पर भी पूजा जारी रह सकती है (कुछ परम्पराओं में)
  • शालग्राम शिला — प्राकृतिक होने से खंडन का प्रश्न प्रायः नहीं उठता
  • मामूली मरम्मत — कुछ विद्वानों के अनुसार यदि मूर्ति का मूल स्वरूप अक्षुण्ण हो तो मरम्मत स्वीकार्य

5घर की मूर्ति

घर की पूजा की मूर्ति यदि खंडित हो जाए — उसे भी विसर्जित करें और नवीन मूर्ति स्थापित करें।

सावधानी

खंडित मूर्ति को रखना अशुभ माना जाता है — न पूजा करें, न रखें। शीघ्र विसर्जन करें।

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शास्त्रीय स्रोत
अग्निपुराण, मत्स्यपुराण, शिल्पशास्त्र, स्कन्दपुराण, धर्मसिन्धु
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