मंदिर में अभिषेक करवाने के नियम क्या हैं?
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अभिषेक नियम: स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें। शिवलिंग पर दक्षिण मुख कर, उत्तर से जल गिराएँ। क्रम: जल→दूध→दही→घी→शहद→पंचामृत→चंदन→गंगाजल। 'ॐ नमः शिवाय' जप अनिवार्य। बिल्वपत्र अर्पित करें। तुलसी/केतकी वर्जित। पुजारी के निर्देशानुसार करें।
- 1अभिषेक से पूर्व स्नान अनिवार्य
- 2स्वच्छ वस्त्र धारण करें (धोती-दुपट्टा उत्तम, सिला हुआ वस्त्र भी स्वीकार्य)
- 3चर्म रोग, बुखार, सर्दी-जुकाम, या रक्तस्राव की स्थिति में अभिषेक न करें
- 4प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक) सर्वश्रेष्ठ
- 5सोमवार, प्रदोष काल, शिवरात्रि — शिव अभिषेक के लिए विशेष शुभ
- 6शुक्ल पक्ष — सामान्यतः अधिक शुभ
- 7शिवलिंग पर जल उत्तर दिशा की ओर से गिरना चाहिए
- 8अभिषेक करने वाले का मुख दक्षिण दिशा में होना चाहिए
- 9पूर्व दिशा से जल न चढ़ाएं (शिव का मुख्य द्वार माना जाता है)
- 10'ॐ नमः शिवाय' या रुद्र मंत्र का जप करें
- 11मंत्र जप के बिना अभिषेक अपूर्ण माना जाता है
- 12एकाग्र मन से करें — बातचीत न करें
- 13बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, शमी पत्ते अर्पित करें
- 14धूप-दीप जलाएं और आरती करें
- 15भोग (नैवेद्य) अर्पित करें
- 16दक्षिणा/दान दें
- 17जलाभिषेक — शुद्ध जल/गंगाजल (सरलतम)
- 18पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
- 19रुद्राभिषेक — 108 पवित्र द्रव्यों से, रुद्र मंत्रोच्चार के साथ
- 20महारुद्राभिषेक — 11 पंडित, 11 कलश — अत्यन्त विस्तृत
- 21शिवलिंग पर तुलसी और केतकी के पुष्प वर्जित (शिवपुराण)
- 22शिवलिंग पर कुंकुम/सिंदूर न लगाएं (कुछ परम्पराओं में अपवाद)
- 23अभिषेक जल (चरणामृत) को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करें — फेंकें नहीं
- 24मंदिर के पुजारी के निर्देशानुसार ही अभिषेक करें
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