मंदिर में ध्वजस्तंभ का वास्तु में क्या स्थान है?
की चेकलिस्ट
वास्तु स्थान: गर्भगृह के सामने केन्द्रीय अक्ष पर (गर्भगृह→बलिपीठ→ध्वजस्तंभ→प्रवेश)। महत्व: ब्रह्मांडीय धुरी (तीन लोक जोड़ती), देवता उपस्थिति प्रतीक, दिशा-निर्देश, ऊर्जा संचार, नकारात्मकता निवारण। गरुड पुराण: 'ध्वजा फड़फड़ाहट = पाप नाश।' बिना ध्वजा = असुर निवास। देवता अनुसार रंग/चिह्न भिन्न।
- 1सामग्री: ताँबा, पीतल, या स्वर्ण-आच्छादित लकड़ी/धातु
- 2ऊँचाई: मंदिर शिखर से कम (शिखर सर्वोच्च)
- 3आकार: अष्टकोणीय (Octagonal) या गोलाकार — ऊपर की ओर पतला
- 4शीर्ष: देवता-विशिष्ट चिह्न — विष्णु (गरुड़), शिव (नंदी/त्रिशूल), देवी (सिंह)
- 5विष्णु/राम: केसरिया/पीला — गरुड़ ध्वज
- 6शिव: श्वेत/भगवा — नंदी/त्रिशूल चिह्न
- 7देवी: लाल/गुलाबी — सिंह चिह्न
- 8कृष्ण: नीला/केसरिया
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श्रेणी
मंदिर वास्तु
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