का सरल उत्तर
वास्तु स्थान: गर्भगृह के सामने केन्द्रीय अक्ष पर (गर्भगृह→बलिपीठ→ध्वजस्तंभ→प्रवेश)। महत्व: ब्रह्मांडीय धुरी (तीन लोक जोड़ती), देवता उपस्थिति प्रतीक, दिशा-निर्देश, ऊर्जा संचार, नकारात्मकता निवारण। गरुड पुराण: 'ध्वजा फड़फड़ाहट = पाप नाश।' बिना ध्वजा = असुर निवास। देवता अनुसार रंग/चिह्न भिन्न।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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