मंदिर में कलावा बांधने की परंपरा कहाँ से आई?
की चेकलिस्ट
कलावा उद्गम: वैदिक यज्ञ — यजमान को संकल्प+रक्षा सूत्र। भविष्य पुराण: शची ने इन्द्र को बाँधा। मंदिर में: पूजा संकल्प का प्रतीक+रक्षा कवच। मंत्र: 'येन बद्धो बली राजा...' पुरुष=दाहिना, स्त्री=बाँया। लाल=शक्ति, पीला=समृद्धि। उतारने पर पीपल जड़ में बाँधें।
- 1'जिस रक्षा सूत्र से बलशाली दानवराज बलि बाँधे गए, उसी से मैं तुम्हें बाँधता हूँ। हे रक्षा! अचल रहो, अचल रहो।'
- 2पुरुष: दाहिने हाथ (दक्षिण = शुभ)
- 3स्त्री: बाएं हाथ (वाम)
- 4कुछ परम्पराओं में: दोनों को दाहिने पर
- 5लाल = शक्ति, रक्षा, अग्नि तत्व
- 6पीला = समृद्धि, ज्ञान, बृहस्पति
- 7लाल+पीला = शक्ति+समृद्धि संयुक्त
- 8कलावा स्वतः टूट जाए तो उतारें
- 9अन्यथा मंगलवार या शनिवार को उतारकर पीपल/बरगद की जड़ में बाँधें
- 10कूड़ेदान में न फेंकें — पवित्र वस्तु है
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मंदिर परम्परा
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