मंदिर में मूर्ति का विसर्जन कब और कैसे होता है?
की चेकलिस्ट
उत्सव मूर्ति: गणेश (अनन्त चतुर्दशी), दुर्गा (विजयदशमी)। विधि: उद्वासन पूजा → अंतिम आरती → शोभायात्रा → जल में विसर्जन + 'पुनरागमनाय च'। स्थायी: खंडित/पुरानी → उद्वासन → जल विसर्जन → नवीन+प्राण प्रतिष्ठा। पर्यावरण: मिट्टी+प्राकृतिक रंग, विसर्जन कुंड। तात्पर्य: अस्थायित्व का पाठ।
- 1उद्वासन पूजा: मूर्ति से देवता की चैतन्य शक्ति को विदा करना। 'हे भगवान, आपके स्वधाम लौटने की प्रार्थना करता हूँ।'
- 2अंतिम आरती: पूर्ण श्रृंगार → अंतिम आरती → भोग
- 3शोभायात्रा: मूर्ति को सजाकर जल स्रोत (नदी/सरोवर/समुद्र) तक ले जाना — ढोल-नगाड़े, भजन, नृत्य
- 4विसर्जन: मूर्ति को जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करना
- 5मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः — पुनरागमनाय च' (पुनः आगमन हेतु)
- 6भाव: विदाई + पुनः आगमन का निमंत्रण — 'अगले वर्ष फिर आइएगा'
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
मंदिर संस्कार
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।