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मंदिर संस्कार📜 अग्निपुराण, शिल्पशास्त्र, आगम शास्त्र, उत्सव परम्परा, धर्मसिन्धु2 मिनट पठन

मंदिर में मूर्ति का विसर्जन कब और कैसे होता है?

संक्षिप्त उत्तर

उत्सव मूर्ति: गणेश (अनन्त चतुर्दशी), दुर्गा (विजयदशमी)। विधि: उद्वासन पूजा → अंतिम आरती → शोभायात्रा → जल में विसर्जन + 'पुनरागमनाय च'। स्थायी: खंडित/पुरानी → उद्वासन → जल विसर्जन → नवीन+प्राण प्रतिष्ठा। पर्यावरण: मिट्टी+प्राकृतिक रंग, विसर्जन कुंड। तात्पर्य: अस्थायित्व का पाठ।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर/पूजा में मूर्ति का विसर्जन दो प्रकार से होता है — उत्सव मूर्ति का विसर्जन और स्थायी मूर्ति का विसर्जन (खंडित/पुरानी)।

1उत्सव मूर्ति का विसर्जन (सबसे प्रचलित)

कब

  • गणेश विसर्जन: गणेश चतुर्थी के 1.5/3/5/7/9/11 दिन बाद (अनन्त चतुर्दशी = सर्वाधिक)
  • दुर्गा विसर्जन: दशहरा (विजयदशमी) पर
  • लक्ष्मी-सरस्वती: कोजागिरी/बसन्त पंचमी बाद
  • नवरात्रि कलश: नवमी/दशमी पर

विसर्जन विधि

  1. 1उद्वासन पूजा: मूर्ति से देवता की चैतन्य शक्ति को विदा करना। 'हे भगवान, आपके स्वधाम लौटने की प्रार्थना करता हूँ।'
  2. 2अंतिम आरती: पूर्ण श्रृंगार → अंतिम आरती → भोग
  3. 3शोभायात्रा: मूर्ति को सजाकर जल स्रोत (नदी/सरोवर/समुद्र) तक ले जाना — ढोल-नगाड़े, भजन, नृत्य
  4. 4विसर्जन: मूर्ति को जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करना
  5. 5मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः — पुनरागमनाय च' (पुनः आगमन हेतु)
  6. 6भाव: विदाई + पुनः आगमन का निमंत्रण — 'अगले वर्ष फिर आइएगा'

2स्थायी/खंडित मूर्ति का विसर्जन

कब

  • मूर्ति खंडित (टूटी/दरार) हो जाए
  • मूर्ति अत्यन्त पुरानी/क्षतिग्रस्त हो
  • नवीन मूर्ति स्थापना पर पुरानी का विसर्जन

विधि (पूर्व बैच 939 से)

  • उद्वासन (चैतन्य शक्ति कलश में स्थानांतरित)
  • विधिवत पूजा + मंत्र
  • पवित्र जलाशय में विसर्जन
  • नवीन मूर्ति + प्राण प्रतिष्ठा

3विसर्जन कहाँ

  • नदी (गंगा/यमुना/नर्मदा = सर्वोत्तम)
  • सरोवर/तालाब (पवित्र)
  • समुद्र (तटीय क्षेत्र)
  • विसर्जन कुंड (आधुनिक — पर्यावरण हेतु)

पर्यावरण चिन्ता

  • POP (प्लास्टर ऑफ पेरिस) मूर्तियाँ = जल प्रदूषण
  • रासायनिक रंग = हानिकारक
  • समाधान: मिट्टी की मूर्ति (Eco-Friendly), प्राकृतिक रंग, विसर्जन कुंड
  • अनेक नगर निगम = कृत्रिम कुंड व्यवस्था

आध्यात्मिक तात्पर्य

विसर्जन = 'सब कुछ प्रकृति से आता है और प्रकृति में लौट जाता है।' यह अस्थायित्व (Impermanence) का पाठ — जीवन का मूल सत्य।

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शास्त्रीय स्रोत
अग्निपुराण, शिल्पशास्त्र, आगम शास्त्र, उत्सव परम्परा, धर्मसिन्धु
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