विस्तृत उत्तर
मंदिर/पूजा में मूर्ति का विसर्जन दो प्रकार से होता है — उत्सव मूर्ति का विसर्जन और स्थायी मूर्ति का विसर्जन (खंडित/पुरानी)।
1उत्सव मूर्ति का विसर्जन (सबसे प्रचलित)
कब
- ▸गणेश विसर्जन: गणेश चतुर्थी के 1.5/3/5/7/9/11 दिन बाद (अनन्त चतुर्दशी = सर्वाधिक)
- ▸दुर्गा विसर्जन: दशहरा (विजयदशमी) पर
- ▸लक्ष्मी-सरस्वती: कोजागिरी/बसन्त पंचमी बाद
- ▸नवरात्रि कलश: नवमी/दशमी पर
विसर्जन विधि
- 1उद्वासन पूजा: मूर्ति से देवता की चैतन्य शक्ति को विदा करना। 'हे भगवान, आपके स्वधाम लौटने की प्रार्थना करता हूँ।'
- 2अंतिम आरती: पूर्ण श्रृंगार → अंतिम आरती → भोग
- 3शोभायात्रा: मूर्ति को सजाकर जल स्रोत (नदी/सरोवर/समुद्र) तक ले जाना — ढोल-नगाड़े, भजन, नृत्य
- 4विसर्जन: मूर्ति को जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करना
- 5मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः — पुनरागमनाय च' (पुनः आगमन हेतु)
- 6भाव: विदाई + पुनः आगमन का निमंत्रण — 'अगले वर्ष फिर आइएगा'
2स्थायी/खंडित मूर्ति का विसर्जन
कब
- ▸मूर्ति खंडित (टूटी/दरार) हो जाए
- ▸मूर्ति अत्यन्त पुरानी/क्षतिग्रस्त हो
- ▸नवीन मूर्ति स्थापना पर पुरानी का विसर्जन
विधि (पूर्व बैच 939 से)
- ▸उद्वासन (चैतन्य शक्ति कलश में स्थानांतरित)
- ▸विधिवत पूजा + मंत्र
- ▸पवित्र जलाशय में विसर्जन
- ▸नवीन मूर्ति + प्राण प्रतिष्ठा
3विसर्जन कहाँ
- ▸नदी (गंगा/यमुना/नर्मदा = सर्वोत्तम)
- ▸सरोवर/तालाब (पवित्र)
- ▸समुद्र (तटीय क्षेत्र)
- ▸विसर्जन कुंड (आधुनिक — पर्यावरण हेतु)
पर्यावरण चिन्ता
- ▸POP (प्लास्टर ऑफ पेरिस) मूर्तियाँ = जल प्रदूषण
- ▸रासायनिक रंग = हानिकारक
- ▸समाधान: मिट्टी की मूर्ति (Eco-Friendly), प्राकृतिक रंग, विसर्जन कुंड
- ▸अनेक नगर निगम = कृत्रिम कुंड व्यवस्था
आध्यात्मिक तात्पर्य
विसर्जन = 'सब कुछ प्रकृति से आता है और प्रकृति में लौट जाता है।' यह अस्थायित्व (Impermanence) का पाठ — जीवन का मूल सत्य।





