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चेकलिस्ट

मंदिर में पूजा के दौरान ध्यान कैसे करें?

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योगसूत्र (3.1-3): धारणा → ध्यान → समाधि। विधि: पद्मासन, रीढ़ सीधी, श्वास स्थिर। भागवत (2.2.8-13): मूर्ति के चरणों से आरंभ, पूरे स्वरूप तक क्रमिक ध्यान। भाव: 'भगवान मेरे हृदय में भी हैं।' ब्रह्ममुहूर्त में 10-15 मिनट न्यूनतम।

  1. 1धारणा (3.1): 'देशबन्धश्चित्तस्य धारणा।' — एक स्थान (देव-स्वरूप) पर चित्त बाँधना = धारणा।
  2. 2ध्यान (3.2): 'तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्।' — उसी बिंदु पर चित्त का निरंतर प्रवाह = ध्यान।
  3. 3समाधि (3.3): 'तदेवार्थमात्रनिर्भासं स्वरूपशून्यमिव समाधिः।' — ध्येय ही शेष रहे, ध्याता मिट जाए = समाधि।
  4. 4आँखें खोलकर मूर्ति के चरणों को देखें।
  5. 5आँखें बंद करें — वही स्वरूप मन में जीवंत करें।
  6. 6चरणों से आरंभ कर धीरे-धीरे पूरे स्वरूप तक जाएं।
  7. 7वस्त्र, आभूषण, मुकुट, मुस्कान — सब क्रमशः ध्यान में उभरने दें।
  8. 8विचार आएं → दोष न मानें, धीरे से मूर्ति/नाम पर लौटें।
  9. 9नींद आए → श्वास थोड़ी तेज करें, आँखें अर्धखुली रखें।
  10. 10बेचैनी → शरीर की स्थिति ठीक करें, श्वास धीमा करें।
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मंदिर पूजा

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