ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
चेकलिस्ट

मंदिर में प्रसाद वितरण का शास्त्रीय नियम क्या है?

की चेकलिस्ट

नियम: पहले देवता को अर्पित → फिर वितरण। समानता: जाति-वर्ण-लिंग भेद नहीं (जगन्नाथ उदाहरण)। दाहिने हाथ से दें/लें, जूठा न छोड़ें, भूमि पर न गिराएँ। बासी न होने दें — खराब हो तो जल/वृक्ष में। घर लाकर बाँटना = विशेष पुण्य। गीता: प्रसाद खाने वाले सर्वपाप मुक्त।

  1. 1दाहिने हाथ से दें
  2. 2दोनों हाथों से ग्रहण करें (लेने वाला)
  3. 3सम्मानपूर्वक — भूमि पर न फेंकें
  4. 4पर्याप्त मात्रा में — कम भी न दें, अत्यधिक भी नहीं (बर्बादी न हो)
  5. 5दाहिने हाथ से ग्रहण करें
  6. 6तुरन्त खाएँ या सम्मानपूर्वक रखें
  7. 7जूठा न छोड़ें — पूरा ग्रहण करें
  8. 8भूमि पर न गिराएँ — गिर जाए तो उठाकर सम्मानपूर्वक रखें
  9. 9चरणामृत — तीन बार ग्रहण, शेष सिर पर लगाएँ
  10. 10सर्वप्रथम पुजारी/आचार्य
  11. 11फिर यजमान (पूजा करवाने वाला)
  12. 12फिर ब्राह्मण/वरिष्ठ
  13. 13फिर सभी उपस्थित भक्त
  14. 14अंत में बच्चे/सेवक
  15. 15प्रसाद = भगवान की कृपा — इसे कभी अपमानित न करें
  16. 16बासी/खराब न होने दें — शीघ्र वितरित करें
  17. 17फेंकना = पाप — खराब होने पर वृक्ष जड़ में या जल में विसर्जित
  18. 18प्रसाद बेचना = निंदनीय (जगन्नाथ पुरी का 'आनन्द बाजार' अपवाद — मंदिर व्यवस्था)
  19. 19मंदिर का प्रसाद घर लाकर परिवार में बाँटना = अत्यन्त शुभ
  20. 20जो मंदिर न जा सके (बीमार, वृद्ध, बच्चे) — उन्हें प्रसाद पहुँचाना = विशेष पुण्य
  21. 21तिरुपति: लड्डू प्रसाद (विश्व प्रसिद्ध)
  22. 22जगन्नाथ: महाप्रसाद (56 भोग)
  23. 23शिरडी: उड़ी (विभूति)
  24. 24वैष्णो देवी: चरणामृत + प्रसाद पैकेट
  25. 25'प्रसादम्' — भव्य भोजन वितरण
  26. 26यज्ञ/पूजा का शेष (प्रसाद) खाने वाले सज्जन सभी पापों से मुक्त होते हैं।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
मंदिर पूजा

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।