मंदिर में तुलसी का पौधा क्यों होता है?
की चेकलिस्ट
धार्मिक: विष्णुप्रिया — विष्णु पूजा अपूर्ण बिना तुलसी। वृन्दा = देवी रूप। कार्तिक में तुलसी विवाह। नकारात्मक शक्ति निवारक। वैज्ञानिक: Air Purifier, जीवाणु नाशक, मच्छर निवारक, औषधीय। चौकोर चबूतरे पर स्थापना। शिवलिंग पर वर्जित। रविवार/एकादशी पत्ते न तोड़ें।
- 1तुलसी जहाँ होती है, वहाँ नकारात्मक शक्तियाँ प्रवेश नहीं करतीं
- 2तुलसी का पौधा = मंदिर/घर का रक्षा कवच
- 3तुलसी के पत्ते और गंगाजल कभी बासी नहीं माने जाते
- 4मंदिर के प्रवेश या आँगन में
- 5ऊँचे चौकोर चबूतरे (तुलसी चौरा/वृन्दावन) पर
- 6प्रातःकाल और सायंकाल दीप जलाना
- 7नियमित जल सिंचन और पूजा
- 8रविवार और एकादशी को तुलसी पत्ते न तोड़ें (कुछ परम्पराओं में)
- 9तुलसी शिवलिंग पर न चढ़ाएँ (विष्णु-प्रिया होने से)
- 10तुलसी तोड़ते समय क्षमा याचना मंत्र
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
मंदिर वास्तु
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।