मंदिर में यज्ञ करवाने का क्या विधान है?
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यज्ञ विधान: प्रकार चुनें (गणपति/नवग्रह/रुद्र)। मंदिर से सम्पर्क → मुहूर्त → पुरोहित। विधि: कुंड निर्माण → कलश → संकल्प → अग्नि स्थापना → आहुति (108/1008, 'स्वाहा') → पूर्णाहुति → शान्ति पाठ → भोजन+दक्षिणा। अवधि: 1-9 दिन। अग्नि सुरक्षा + ब्रह्मचर्य + सात्विक आहार।
- 1हवन (होम): छोटा अग्नि अनुष्ठान — एक कुंड, कम समय
- 2यज्ञ: विस्तृत — एक या अनेक कुंड, अनेक पुरोहित, लम्बी अवधि
- 3सामान्यतः दोनों शब्द एक-दूसरे के पर्याय में प्रयुक्त
- 4गणपति यज्ञ — विघ्न निवारण (प्रारम्भ सर्वदा गणपति से)
- 5नवग्रह यज्ञ — ग्रह दोष शान्ति
- 6रुद्र यज्ञ — शिव कृपा, रोग-शत्रु नाश
- 7सत्यनारायण यज्ञ — सर्वमंगल
- 8वास्तु यज्ञ — गृह शान्ति
- 9अग्निहोत्र — नित्य (सरलतम)
- 10महायज्ञ — विशेष अवसर (सहस्र कुंड आदि)
- 11मंदिर प्रशासन/मुख्य पुरोहित से सम्पर्क
- 12शुभ मुहूर्त (ज्योतिषी से)
- 13योग्य वेदपाठी पुरोहित/आचार्य
- 14यज्ञ सामग्री (कुंड, समिधा, घी, सामग्री)
- 15बजट निर्धारण
- 16वेदी निर्माण — यज्ञ कुंड (चौकोर/गोल)
- 17कलश स्थापना — नवग्रह/दिक्पाल
- 18संकल्प — यजमान (नाम, गोत्र, उद्देश्य)
- 19अग्नि स्थापना — वैदिक मंत्रों से अग्नि प्रज्वलित
- 20प्रधान होम — मुख्य मंत्रों के साथ आहुतियाँ
- 21पूर्णाहुति — अंतिम आहुति (नारियल+घी+सामग्री)
- 22शान्ति पाठ — 'ॐ द्यौः शान्तिः...'
- 23प्रसाद वितरण + ब्राह्मण भोजन + दक्षिणा
- 24सामान्य: 108 या 1008
- 25विशेष: 10,000 / 1,00,000
- 26दशांश नियम: मंत्र जप का 10% = हवन आहुति
- 27एक दिन (सामान्य)
- 283 दिन, 5 दिन, 7 दिन, 9 दिन (विस्तृत)
- 29अनुष्ठान अनुसार भिन्न
- 30यज्ञ कुंड में अग्नि सम्भालकर — अग्नि सुरक्षा
- 31आहुति देते समय 'स्वाहा' + 'इदं न मम' (यह मेरा नहीं)
- 32यज्ञ काल में ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार
- 33धुएँ से सावधानी — दमा/श्वास रोगी दूर बैठें
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मंदिर अनुष्ठान
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