मंत्र जप करते समय पसीना आने का क्या कारण है
की चेकलिस्ट
जप में पसीना: (1) ऊर्जा जागृति — प्राणशक्ति ताप = शुभ संकेत। (2) तप = ताप, पाप जलना। (3) शरीर शुद्धि — अशुद्धि बाहर। व्यावहारिक: एकाग्रता → तापमान वृद्धि, प्राणायाम। सामान्य और शुभ — जप जारी रखें। अत्यधिक हो तो विश्राम + जल।
- 1गहन एकाग्रता से शरीर का तापमान बढ़ता है।
- 2प्राणायाम/श्वास नियन्त्रण से शरीर में ऑक्सीजन परिसंचरण बढ़ता है।
- 3बन्द कमरे, गर्म मौसम, ऊनी आसन = बाह्य कारण।
- 4घबराएँ नहीं — यह सामान्य और शुभ है।
- 5जप जारी रखें।
- 6पानी पास रखें (जप के बाद पिएँ)।
- 7हवादार स्थान चुनें।
- 8यदि अत्यधिक पसीना/चक्कर आए तो रुकें, जल पिएँ।
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मंत्र साधना
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