मंत्र जप के दौरान कौन सा भोग चढ़ाएं?
की चेकलिस्ट
गीता (9.26): श्रद्धा से अर्पित कुछ भी स्वीकार। देवता-अनुसार: विष्णु (माखन-खीर-तुलसी), शिव (बेलफल-दूध), काली (गुड़हल-नारियल), गणपति (मोदक), हनुमान (लड्डू-सिन्दूर), लक्ष्मी (खीर-कमलगट्टे)। नियम: सात्विक, ताजा, स्वयं न चखें। जप से पहले अर्पण, बाद में प्रसाद।
- 1सात्विक भोग: घर में पका, शुद्ध, ताजा — सर्वोत्तम
- 2वर्जित: बासी, तीखा, मदिरा, मांस (सामान्य साधना में)
- 3जप से पूर्व: स्वयं न चखें — पहले देवता को अर्पित करें
- 4जप के बाद: प्रसाद रूप में ग्रहण करें
- 5संख्या: भोग की मात्रा जप-संख्या के अनुरूप — छोटे जप में न्यून, बड़े अनुष्ठान में विशेष
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