मंत्र जप के दौरान कोई बोलने लगे तो क्या करना चाहिए?
की चेकलिस्ट
सामान्यतः बीच में बोलना अनुशंसित नहीं। अत्यावश्यक: रोकें → बात → पुनः जप। अनावश्यक: संकेत दें, बाद में। अनुष्ठान: मौन अनिवार्य। दैनिक: अत्यधिक कठोरता न रखें। निश्चित समय/स्थान = बाधा न्यूनतम। नियमितता > कठोरता।
- 1अत्यावश्यक हो: जप रोकें, बात करें, फिर मन शांत कर जप जारी रखें। गिनती जहां छूटी वहां से।
- 2अनावश्यक हो: संकेत (हाथ का इशारा) से बताएं कि जप में हैं — बाद में बात करें।
- 3मानसिक जप जारी रखें: बाहरी बातचीत + मन में जप = उन्नत साधकों का अभ्यास।
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