मंत्र जप की गति तेज होनी चाहिए या धीमी?
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मध्यम सर्वोत्तम। 'नातिशीघ्रं नातिविलम्बितम्।' शुरुआत: धीमी (सीखना)। अभ्यास: मध्यम (लय)। अनुष्ठान: मध्यम-तीव्र। शुद्धता > गति। लय/प्रवाह बनाएं।
- 1न बहुत तेज (अशुद्ध उच्चारण) — न बहुत धीमी (नींद/बोरियत)।
- 2शास्त्र: 'नातिशीघ्रं नातिविलम्बितम्' — न अति शीघ्र, न अति विलंबित।
- 3शुरुआत: धीमी → प्रत्येक अक्षर स्पष्ट → सीखना।
- 4अभ्यास: मध्यम → स्वाभाविक लय → सर्वोत्तम।
- 5एकाग्रता भंग: धीमी करें → पुनः focus।
- 6अनुष्ठान (बड़ी संख्या): मध्यम-तीव्र → समय प्रबंधन। किन्तु शुद्धता > गति।
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