मंत्र जप में भूत शुद्धि का क्या अर्थ है?
की चेकलिस्ट
पंचभूत (पृथ्वी/जल/अग्नि/वायु/आकाश) शुद्धि। बीज: लं/वं/रं/यं/हं — 5 चक्रों पर। भौतिक→दिव्य शरीर। 'मैं आत्मा हूं' भावना। तांत्रिक में अनिवार्य।
- 1पृथ्वी: मूलाधार (गुदा) — 'लं' बोलें + कल्पना: शरीर का भारीपन दूर।
- 2जल: स्वाधिष्ठान (नाभि नीचे) — 'वं'।
- 3अग्नि: मणिपुर (नाभि) — 'रं' — अग्नि से शरीर शुद्ध।
- 4वायु: अनाहत (हृदय) — 'यं'।
- 5आकाश: विशुद्धि (गला) — 'हं'।
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