मंत्र जप में संकल्प का क्या महत्व है?
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संकल्प = उद्देश्य + प्रतिज्ञा। 'संकल्पमूलो हि कामः' — सभी कर्म संकल्प मूल। बोलें: काल, स्थान, नाम, गोत्र, मंत्र, संख्या, उद्देश्य। क्यों: एकाग्रता, ऊर्जा निर्देशन, प्रतिबद्धता, पूर्ण फल। निष्काम: 'ईश्वर प्रीत्यर्थे' = सर्वोच्च।
- 1काल: तिथि, वार, मास, वर्ष, संवत्सर।
- 2स्थान: देश, प्रदेश, नगर।
- 3साधक: नाम, गोत्र।
- 4मंत्र: कौन सा मंत्र।
- 5संख्या: कितने जप।
- 6उद्देश्य: किस कामना हेतु।
- 7दिशा: मन को स्पष्ट लक्ष्य → एकाग्रता बढ़ती है।
- 8मंत्र ऊर्जा निर्देशित: संकल्प = ऊर्जा को विशिष्ट दिशा/उद्देश्य में भेजना।
- 9प्रतिबद्धता: संकल्प = वचन → अनुशासन बढ़ता है।
- 10पूर्ण फल: संकल्प सहित जप = पूर्ण फल। बिना = अनिश्चित।
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