विस्तृत उत्तर
संकल्प = मंत्र जप/पूजा/अनुष्ठान से पूर्व उद्देश्य और प्रतिज्ञा का स्पष्ट कथन। बिना संकल्प कर्म = बिना लक्ष्य तीर = कहीं नहीं पहुंचता।
शास्त्रीय महत्व
संकल्पमूलो हि कामः' — सभी कर्म संकल्प मूल हैं। बिना संकल्प कर्म अपूर्ण।
संकल्प में क्या बोलें
- 1काल: तिथि, वार, मास, वर्ष, संवत्सर।
- 2स्थान: देश, प्रदेश, नगर।
- 3साधक: नाम, गोत्र।
- 4मंत्र: कौन सा मंत्र।
- 5संख्या: कितने जप।
- 6उद्देश्य: किस कामना हेतु।
सरल संकल्प
मैं (नाम) आज (तिथि) (मंत्र नाम) का (संख्या) जप (उद्देश्य — स्वास्थ्य/शांति/सिद्धि) के लिए कर रहा/रही हूं।
संकल्प क्यों आवश्यक
- 1दिशा: मन को स्पष्ट लक्ष्य → एकाग्रता बढ़ती है।
- 2मंत्र ऊर्जा निर्देशित: संकल्प = ऊर्जा को विशिष्ट दिशा/उद्देश्य में भेजना।
- 3प्रतिबद्धता: संकल्प = वचन → अनुशासन बढ़ता है।
- 4पूर्ण फल: संकल्प सहित जप = पूर्ण फल। बिना = अनिश्चित।
निष्काम संकल्प: 'ईश्वर प्रीत्यर्थे' (ईश्वर की प्रसन्नता हेतु) — सर्वोच्च संकल्प = बिना कामना।





