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मंत्र जप से अष्ट सिद्धि प्राप्त करने का क्या विधान है?

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पतंजलि (3.45): शरीर जय → सिद्धि। गुरु अनिवार्य। वर्षों/दशकों साधना। ब्रह्मचर्य, त्याग, एकांत। गीता: सिद्धि आसक्ति = मोक्ष बाधक। पतंजलि (3.37): 'सिद्धियां समाधि में उपसर्ग (बाधा)।' सामान्य: भक्ति/शांति/मोक्ष = लक्ष्य, सिद्धि नहीं।

  1. 1गुरु अनिवार्य — बिना सिद्ध गुरु अष्ट सिद्धि = असंभव।
  2. 2वर्षों/दशकों की गहन साधना — रातोंरात नहीं।
  3. 3पूर्ण ब्रह्मचर्य, त्याग, एकांत।
  4. 4विशिष्ट मंत्र + विशिष्ट विधि = गुरुमुखी (सार्वजनिक नहीं)।
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