ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
चेकलिस्ट

मंत्र जप से भगवान का अनुभव कैसे होता है?

की चेकलिस्ट

नारद भक्तिसूत्र: भगवद्-अनुभव = सिद्धता, अमृतत्व, तृप्ति। नाम-नामी अभेद (भागवत): गहरे जप में भगवान में लीनता। चार स्तर: स्थूल (शांति), सूक्ष्म (अष्टसात्विक भाव — अश्रु-रोमांच), स्वप्न दर्शन, साक्षात्। तुलसीदास: 'राम नाम मणिदीप — अंदर-बाहर प्रकाश।' अनुभव खोजें नहीं — शुद्धता से आता है।

  1. 1निरंतरता — नित्य जप, कभी न छूटे
  2. 2प्रेम — मंत्र को भगवान से प्रेम के रूप में जपें — यंत्रवत् नहीं
  3. 3समर्पण — 'मैं जप करता हूँ' यह अहंकार छोड़ें
  4. 4अपेक्षारहितता — अनुभव की माँग न करें
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
मंत्र जप

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।