मंत्र जप से पहले आसन शुद्धि कैसे करें?
की चेकलिस्ट
आसन शुद्धि: स्वच्छ शांत स्थान → गंगाजल/गोमूत्र छिड़काव → कुश/ऊनी/रेशमी आसन → 'ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका...' मंत्र → 3 बार जल छिड़क → अक्षत रखें। कुश=ग्रह शांति, ऊनी=ध्यान, रेशम=सिद्धि। व्यक्तिगत, निश्चित आसन।
- 1स्थान चयन: शांत, स्वच्छ, एकांत स्थान। पूर्व या उत्तर दिशा में मुख।
- 2भूमि शुद्धि: जप स्थल पर गंगाजल या शुद्ध जल छिड़कें। गोमूत्र (उपलब्ध हो तो) से शुद्धि सर्वोत्तम।
- 3आसन बिछाएँ: कुश (दर्भ) का आसन सर्वश्रेष्ठ। अन्य विकल्प: ऊनी कम्बल, रेशमी वस्त्र, कपास का आसन। जमीन पर सीधे न बैठें।
- 4आसन शुद्धि मंत्र: 'ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्।' (हे पृथ्वी देवी! मेरे आसन को पवित्र करें।) — यह मंत्र बोलकर आसन को स्पर्श करें।
- 5आसन पर अक्षत/पुष्प: बैठने से पहले आसन पर 3 बार जल छिड़कें और अक्षत (चावल) रखें।
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