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मंत्र साधना📜 योग सूत्र, मंत्र शास्त्र, कर्मकांड ग्रंथ2 मिनट पठन

मंत्र जप से पहले आसन शुद्धि कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

आसन शुद्धि: स्वच्छ शांत स्थान → गंगाजल/गोमूत्र छिड़काव → कुश/ऊनी/रेशमी आसन → 'ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका...' मंत्र → 3 बार जल छिड़क → अक्षत रखें। कुश=ग्रह शांति, ऊनी=ध्यान, रेशम=सिद्धि। व्यक्तिगत, निश्चित आसन।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप से पूर्व आसन (बैठने का स्थान) की शुद्धि अनिवार्य मानी गई है।

आसन शुद्धि विधि

  1. 1स्थान चयन: शांत, स्वच्छ, एकांत स्थान। पूर्व या उत्तर दिशा में मुख।
  1. 1भूमि शुद्धि: जप स्थल पर गंगाजल या शुद्ध जल छिड़कें। गोमूत्र (उपलब्ध हो तो) से शुद्धि सर्वोत्तम।
  1. 1आसन बिछाएँ: कुश (दर्भ) का आसन सर्वश्रेष्ठ। अन्य विकल्प: ऊनी कम्बल, रेशमी वस्त्र, कपास का आसन। जमीन पर सीधे न बैठें।
  1. 1आसन शुद्धि मंत्र: 'ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्।' (हे पृथ्वी देवी! मेरे आसन को पवित्र करें।) — यह मंत्र बोलकर आसन को स्पर्श करें।
  1. 1आसन पर अक्षत/पुष्प: बैठने से पहले आसन पर 3 बार जल छिड़कें और अक्षत (चावल) रखें।

आसन के नियम

  • आसन न बहुत ऊँचा न बहुत नीचा। समतल हो।
  • दूसरे का प्रयोग किया आसन न लें (व्यक्तिगत आसन रखें)।
  • आसन पर पैर फैलाकर न बैठें।
  • जप के लिए निश्चित आसन रखें — बार-बार न बदलें।
  • कुश आसन = ग्रह दोष शांति, ऊनी = ध्यान, रेशमी = सिद्धि।
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शास्त्रीय स्रोत
योग सूत्र, मंत्र शास्त्र, कर्मकांड ग्रंथ
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