विस्तृत उत्तर
मंत्र जप से पूर्व आसन (बैठने का स्थान) की शुद्धि अनिवार्य मानी गई है।
आसन शुद्धि विधि
- 1स्थान चयन: शांत, स्वच्छ, एकांत स्थान। पूर्व या उत्तर दिशा में मुख।
- 1भूमि शुद्धि: जप स्थल पर गंगाजल या शुद्ध जल छिड़कें। गोमूत्र (उपलब्ध हो तो) से शुद्धि सर्वोत्तम।
- 1आसन बिछाएँ: कुश (दर्भ) का आसन सर्वश्रेष्ठ। अन्य विकल्प: ऊनी कम्बल, रेशमी वस्त्र, कपास का आसन। जमीन पर सीधे न बैठें।
- 1आसन शुद्धि मंत्र: 'ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्।' (हे पृथ्वी देवी! मेरे आसन को पवित्र करें।) — यह मंत्र बोलकर आसन को स्पर्श करें।
- 1आसन पर अक्षत/पुष्प: बैठने से पहले आसन पर 3 बार जल छिड़कें और अक्षत (चावल) रखें।
आसन के नियम
- ▸आसन न बहुत ऊँचा न बहुत नीचा। समतल हो।
- ▸दूसरे का प्रयोग किया आसन न लें (व्यक्तिगत आसन रखें)।
- ▸आसन पर पैर फैलाकर न बैठें।
- ▸जप के लिए निश्चित आसन रखें — बार-बार न बदलें।
- ▸कुश आसन = ग्रह दोष शांति, ऊनी = ध्यान, रेशमी = सिद्धि।





