मंत्र जप से समाधि अवस्था कैसे प्राप्त होती है?
की चेकलिस्ट
योग सूत्र: 'तज्जपस्तदर्थभावनम्'। जप(धारणा)→ध्यान(एक धारा)→समाधि(मंत्र+मन+देवता=एक)। सविकल्प→निर्विकल्प। चैतन्य/मीरा = नाम→भाव समाधि। वर्षों अभ्यास। गुरु = त्वरित।
- 1जप (धारणा): मंत्र पर ध्यान = एकाग्रता।
- 2ध्यान: निरंतर एकाग्रता = ध्यान — मंत्र + मन = एक धारा।
- 3समाधि: ध्यान इतना गहन कि मंत्र, मन, देवता = तीनों एक = समाधि।
- 4सविकल्प: 'मैं जप कर रहा हूं' = अभी भेद।
- 5निर्विकल्प: 'मैं' भी नहीं — केवल ब्रह्म/देवता = पूर्ण समाधि।
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