मोक्ष क्या है और मोक्ष कैसे प्राप्त होता है
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मोक्ष = जन्म-मृत्यु चक्र से स्थायी मुक्ति, सर्वदुःख निवृत्ति। अद्वैत में — आत्मा-ब्रह्म एकत्व का ज्ञान; विशिष्टाद्वैत में — वैकुंठ में शाश्वत सेवा; द्वैत में — भगवत्सान्निध्य। प्राप्ति: ज्ञान, भक्ति, निष्काम कर्म, ध्यान। गीता 8.15 — भगवान प्राप्ति = पुनर्जन्म नहीं।
- 1संसार चक्र से मुक्ति — जन्म-मृत्यु-पुनर्जन्म के अनंत चक्र से स्थायी मुक्ति।
- 2दुःख से मुक्ति — सभी प्रकार के दुःख (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) से पूर्ण मुक्ति।
- 3विभिन्न दर्शनों में मोक्ष:
- 4ज्ञान (ज्ञान योग) — आत्म-ज्ञान, 'मैं कौन हूं' का बोध।
- 5भक्ति (भक्ति योग) — ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण।
- 6कर्म (कर्म योग) — निष्काम कर्म (फल की इच्छा के बिना)।
- 7राज योग — ध्यान और समाधि।
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आत्मा और मोक्ष
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