विस्तृत उत्तर
मोक्ष (मुक्ति/Liberation) हिंदू दर्शन का परम पुरुषार्थ (सर्वोच्च लक्ष्य) है। चार पुरुषार्थों — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — में मोक्ष सबसे ऊंचा है।
मोक्ष क्या है
- 1संसार चक्र से मुक्ति — जन्म-मृत्यु-पुनर्जन्म के अनंत चक्र से स्थायी मुक्ति।
- 1दुःख से मुक्ति — सभी प्रकार के दुःख (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) से पूर्ण मुक्ति।
- 1विभिन्न दर्शनों में मोक्ष:
- ▸अद्वैत वेदांत (शंकराचार्य) — आत्मा और ब्रह्म एक हैं ('अहं ब्रह्मास्मि')। अविद्या (अज्ञान) दूर होने पर यह ज्ञान प्रकट होता है — यही मोक्ष है। मोक्ष कोई नया स्थान या स्थिति नहीं, बल्कि अपनी वास्तविकता का ज्ञान है।
- ▸विशिष्टाद्वैत (रामानुजाचार्य) — आत्मा ब्रह्म (विष्णु/नारायण) के अंश है। मोक्ष = वैकुंठ में भगवान की शाश्वत सेवा।
- ▸द्वैत (मध्वाचार्य) — आत्मा और ईश्वर भिन्न हैं। मोक्ष = भगवान के सान्निध्य में शाश्वत आनंद।
- ▸शैव सिद्धांत — पशुपति (शिव) की कृपा से पाश (बंधन) से मुक्ति।
मोक्ष कैसे प्राप्त होता है (संक्षेप)
- 1ज्ञान (ज्ञान योग) — आत्म-ज्ञान, 'मैं कौन हूं' का बोध।
- 2भक्ति (भक्ति योग) — ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण।
- 3कर्म (कर्म योग) — निष्काम कर्म (फल की इच्छा के बिना)।
- 4राज योग — ध्यान और समाधि।
(प्रत्येक मार्ग का विस्तार अगले प्रश्नों में है।)
गीता 8.15-16
मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्। नाप्नुवन्ति महात्मानः...' — मुझे प्राप्त करके महात्मा इस दुःखरूप संसार में पुनर्जन्म नहीं लेते।





