मृत व्यक्ति के मुख में सोना क्यों रखते हैं?
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सोना = शुद्धतम धातु (अग्नि तत्व)। पंचतत्व शुद्धि, यमलोक यात्रा सहायता, अंतिम दान/पुण्य। मुख में स्वर्ण + गंगाजल + तुलसी। सोना न हो = चांदी/तांबा। सबसे महत्वपूर्ण = ईश्वर स्मरण।
- 1सोना = अमृत/अग्नि तत्व: सोना सबसे शुद्ध और पवित्र धातु — यह अग्नि तत्व का प्रतीक है। मुख में रखने से शरीर शुद्ध होता है।
- 2पंचतत्व शुद्धि: सोना = अग्नि, गंगाजल = जल, तुलसी = पृथ्वी — सभी तत्वों से शुद्धि।
- 3यमलोक यात्रा: मान्यता है कि सोना मृतक को यमलोक यात्रा में सहायता करता है — यमदूतों से रक्षा।
- 4दान स्वरूप: अंतिम समय में सोना = अंतिम दान — मृतक के खाते में पुण्य।
- 5आत्मा शुद्धि: सोने के स्पर्श से आत्मा शुद्ध होकर शरीर त्यागती है।
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