नाम संकीर्तन का आध्यात्मिक लाभ क्या है
की चेकलिस्ट
नाम-संकीर्तन के लाभ — चित्त-शुद्धि, पाप-नाश, भक्ति-उदय और मोक्ष। भागवत 12.3.52 के अनुसार यह कलियुग में सतयुग के तप, त्रेता के यज्ञ और द्वापर की पूजा का फल देता है। देश-काल का कोई बंधन नहीं।
- 1चित्त-शुद्धि — नाम के कम्पन से हृदय पर जमे कर्म-संस्कारों की धूल साफ होती है।
- 2पाप-नाश — श्रीमद्भागवत (12.13.23) में कहा गया है — 'नामसंकीर्तनं यस्य सर्वपापप्रणाशनम्।'
- 3भक्ति-उदय — निरंतर नाम-संकीर्तन से हृदय में भगवत्-प्रेम जागृत होता है।
- 4मोक्ष का द्वार — नाम-संकीर्तन कर्म के बंधन काटता है और जीव को मुक्ति की ओर ले जाता है।
- 5देश-काल का बंधन नहीं — विष्णुधर्मोत्तर के अनुसार नाम-संकीर्तन में कोई नियम नहीं — जूठे मुँह, अशुद्ध अवस्था में भी किया जा सकता है।
- 6स्वयं के साथ श्रोताओं का उद्धार — ऊँचे स्वर से नाम लेने वाला स्वयं के साथ सुनने वालों को भी शुद्ध करता है।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
भक्ति एवं आध्यात्म
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।