नवचंडी हवन कैसे करवाएं
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नवचंडी हवन: 9 दिन प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती पाठ + दशांश हवन। विधि: संकल्प → गणपति पूजन → कलश स्थापना → सप्तशती पाठ → नवार्ण मंत्र जप → हवन → कुमारी पूजन → पूर्णाहुति। नवरात्रि में सर्वोत्तम। अनुभवी पण्डित से करवाएँ। ग्रह दोष, शत्रु भय नाश, मनोकामना पूर्ति।
- 1शुभ मुहूर्त (विशेषतः नवरात्रि काल) में आरम्भ करें।
- 2अनुभवी और विद्वान पण्डित/पुरोहित से करवाएँ — यह अनुष्ठान स्वयं करना कठिन है।
- 3हवन कुण्ड का पंचभूत संस्कार करें।
- 4संकल्प: यजमान अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य बताकर संकल्प करे।
- 5गणपति पूजन: सर्वप्रथम विघ्नहर्ता गणेश का पूजन।
- 6कलश स्थापना एवं नवग्रह पूजन।
- 7नौ दिन प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का सम्पूर्ण पाठ।
- 8प्रत्येक दिन पाठ के दशांश (1/10) मंत्रों से हवन — प्रत्येक मंत्र के पश्चात् 'स्वाहा' बोलकर आहुति।
- 9नवार्ण मंत्र ('ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे') का जप।
- 10प्रतिदिन कुमारी पूजन (एक कुमारी या बढ़ते क्रम में)।
- 11नवमी या अन्तिम दिन पूर्णाहुति हवन।
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