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निर्गुण ब्रह्म और सगुण ब्रह्म में क्या अंतर

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निर्गुण ब्रह्म = निराकार, गुणरहित, 'नेति नेति' (बृहदारण्यक 2.3.6) — ज्ञान मार्ग। सगुण ब्रह्म = साकार, गुणयुक्त (राम, कृष्ण, शिव) — भक्ति मार्ग। गीता 12.5 — निर्गुण कठिन, सगुण सरल। दोनों एक ही ब्रह्म के दो पहलू — जैसे जल और बर्फ।

  1. 1स्वरूप — गुणरहित, रूपरहित, नामरहित, निराकार, अव्यक्त।
  2. 2वर्णन — 'नेति नेति' (यह नहीं, यह नहीं) — बृहदारण्यक उपनिषद (2.3.6)। ब्रह्म को कहकर नहीं बताया जा सकता, केवल यह बताया जा सकता है कि वह 'यह नहीं' है।
  3. 3उपनिषद वर्णन — 'अशब्दमस्पर्शमरूपमव्ययम्' (कठोपनिषद 1.3.15) — शब्दरहित, स्पर्शरहित, रूपरहित, अव्ययी।
  4. 4शंकराचार्य (अद्वैत) — निर्गुण ब्रह्म ही परम सत्य है। सगुण ब्रह्म माया के सहयोग से प्रकट होता है।
  5. 5साधना — ज्ञान योग, ध्यान, 'अहं ब्रह्मास्मि' का बोध।
  6. 6स्वरूप — गुणयुक्त, रूपवान, नामधारी, साकार — राम, कृष्ण, शिव, देवी आदि।
  7. 7वर्णन — सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, कृपालु, दयालु — ये सगुण ब्रह्म के गुण हैं।
  8. 8गीता वर्णन — गीता अध्याय 11 (विश्वरूप) में सगुण ब्रह्म का भव्य वर्णन।
  9. 9रामानुजाचार्य (विशिष्टाद्वैत) — सगुण ब्रह्म (नारायण) ही परम सत्य है। गुण ब्रह्म के स्वाभाविक हैं, आरोपित नहीं।
  10. 10साधना — भक्ति योग, पूजा, जप, कीर्तन।
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