परमा एकादशी का व्रत किस उद्देश्य से रखें?
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परमा एकादशी: अधिक/पुरुषोत्तम मास शुक्ल एकादशी (2.5-3 वर्ष में एक बार)। उद्देश्य: सर्वपाप नाश, सभी एकादशियों का सम्मिलित पुण्य, मोक्ष कामना। अधिक मास = पुरुषोत्तम (विष्णु) मास — सर्व पुण्य कर्म अनेकगुना फल।
- 1अधिक मास = पुरुषोत्तम मास: अधिक मास को अन्य कोई देवता स्वीकार नहीं करते थे, तब भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) ने इसे अपना मास बनाया। इसलिए इस मास की एकादशी अत्यंत विशेष है।
- 2सर्वपाप नाश: परमा एकादशी का व्रत करने से अन्य सभी एकादशियों का सम्मिलित पुण्य प्राप्त होता है।
- 3मोक्ष प्राप्ति: पद्म पुराण में कहा गया है कि परमा एकादशी का फल मोक्ष तक ले जाता है। 'परमा' = परम (सर्वश्रेष्ठ)।
- 4विशेष पुण्यकाल: अधिक मास में किया गया कोई भी पुण्य कर्म (दान, जप, तप) सामान्य से अनेक गुना फल देता है।
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