पीपल के पेड़ की पूजा कैसे करें?
की चेकलिस्ट
पीपल पूजा: शनिवार सर्वोत्तम। विधि: स्नान → जड़ में जल → रोली-अक्षत → कलावा बाँधें → सरसों तेल दीपक → 7+ परिक्रमा → 'मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णुः...' मंत्र → प्रणाम। त्रिमूर्ति वास (जड़-ब्रह्मा, तना-विष्णु, शाखा-शिव)। बुधवार-रविवार जल वर्जित। कभी न काटें।
- 1शुभ दिन: शनिवार को पीपल पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसके अतिरिक्त अमावस्या, सोमवार और पूर्णिमा भी शुभ हैं। (नोट: बुधवार और रविवार को पीपल में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।)
- 2प्रातःकाल: स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनकर पीपल के पास जाएँ।
- 3जल अर्पण: पीपल की जड़ में शुद्ध जल (गंगाजल उत्तम) अर्पित करें।
- 4तिलक और अक्षत: जड़ पर रोली/कुमकुम का तिलक लगाएँ, अक्षत (चावल) चढ़ाएँ।
- 5कलावा (मौली) बाँधें: पीपल के तने पर कच्चा धागा (कलावा) बाँधें।
- 6धूप-दीपक: सरसों तेल का दीपक जलाएँ (विशेषतः शनिवार को)। अगरबत्ती या धूप लगाएँ।
- 7परिक्रमा: पीपल की कम से कम 7 परिक्रमा करें (शनि शांति हेतु)। कुछ परम्पराओं में 108 परिक्रमा का विधान है।
- 8मंत्र: परिक्रमा करते हुए यह मंत्र बोलें — 'मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णुः शाखा शंकरमेव च। पत्रे-पत्रे सर्वदेवानां वृक्षराज नमोऽस्तु ते।'
- 9प्रणाम: पूजा के बाद हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
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