पीपल की परिक्रमा कब और कैसे करें
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पीपल परिक्रमा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल करें, विशेषकर शनिवार को। 7 परिक्रमा सामान्य विधान है, 108 सर्वोत्तम। दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें। स्टील/पीतल के लोटे से जल में काली तिल-चावल मिलाकर चढ़ाएँ। गीता (10.26): 'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्'। शनि दोष, पितृ दोष निवारण होता है।
- 1स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- 2पीपल की जड़ में जल चढ़ाएँ — स्टील या पीतल के लोटे से (तांबे के लोटे से नहीं, क्योंकि तांबा सूर्य की धातु है और सूर्य-शनि में शत्रुता है)।
- 3जल में काली तिल और चावल मिलाएँ।
- 4हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
- 5परिक्रमा सदैव दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में, दाहिने हाथ की ओर से) करें।
- 6परिक्रमा करते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ शं शनिश्चराय नमः' मंत्र का जप करें।
- 7शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष शुभ है।
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