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पूजा घर में कपूर जलाने का क्या नियम है

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कपूर आरती और वातावरण शुद्धि दोनों के लिए शुभ है। संध्या काल में तांबे के पात्र में जलाएं। शुद्ध भीमसेनी कपूर उपयोग करें, सिंथेटिक नहीं। कपूर आत्मसमर्पण का प्रतीक है — जलकर कोई अवशेष नहीं छोड़ता।

  1. 1आत्म-समर्पण का प्रतीक — कपूर जलकर पूर्णतः समाप्त हो जाता है, कोई अवशेष नहीं छोड़ता। यह भक्त के पूर्ण समर्पण और अहंकार के विलय का प्रतीक है।
  2. 2प्रकाश और सुगंध — कपूर की लौ और सुगंध दोनों दैवी वातावरण बनाती हैं।
  3. 3आरती — कपूर से आरती करना सर्वाधिक प्रचलित और शुभ है।
  4. 4आरती में — आरती थाली में कपूर जलाकर भगवान के सामने घड़ी की दिशा (clockwise) में घुमाएं।
  5. 5शुद्धि हेतु — प्रत्येक कमरे में कपूर जलाकर घुमाना वातावरण शुद्ध करता है। सप्ताह में कम से कम एक बार करें।
  6. 6मात्रा — एक या दो टुकड़े पर्याप्त हैं।
  7. 7समय — संध्या काल (सूर्यास्त के समय) सर्वोत्तम। प्रातःकाल भी शुभ।
  8. 8पात्र — तांबे या पीतल के पात्र में जलाएं। प्लास्टिक या कागज पर न जलाएं।
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