पूजा घर में स्फटिक श्री यंत्र कैसे स्थापित करें
की चेकलिस्ट
स्फटिक श्री यंत्र शुभ मुहूर्त (दीपावली/नवरात्रि/शुक्रवार) पर स्थापित करें। गंगाजल-पंचामृत से स्नान → ईशान कोण में लाल/पीले कपड़े पर स्थापना → श्री सूक्त पाठ → 'ॐ श्रीं नमः' 108 बार जप। नित्य दीपक-धूप अनिवार्य। प्राण प्रतिष्ठा गुरु/पंडित से कराएं।
- 1शुभ मुहूर्त — दीपावली, नवरात्रि, शुक्रवार, पूर्णिमा या शुक्ल पक्ष की किसी शुभ तिथि पर स्थापित करें।
- 2प्राण प्रतिष्ठा — योग्य पंडित या श्री विद्या के दीक्षित आचार्य से प्राण प्रतिष्ठा कराना सर्वोत्तम है। बिना इसके यंत्र मात्र एक आकृति रह जाती है — ऐसी तांत्रिक मान्यता है।
- 3शुद्धि — स्फटिक श्री यंत्र को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। फिर दूध और पंचामृत से स्नान कराएं।
- 4स्थान — पूजा घर में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में या केंद्रीय स्थान पर स्थापित करें। यंत्र का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो।
- 5आसन — लाल या पीले कपड़े पर चौकी/ताम्र पात्र पर स्थापित करें। सीधे भूमि या लकड़ी पर न रखें।
- 6पूजन:
- 7नित्य पूजा — स्थापना के बाद प्रतिदिन कम से कम दीपक, धूप और मंत्र जप करें। श्री यंत्र की उपेक्षा न करें।
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